Saturday, November 26, 2022

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खेलने कूदने की उम्र में इस बच्चे ने खड़ी कर दी करोडो की कम्पनी, बना लाखो लोगों का मसीहा

आज के समय में बड़े-बड़े लोगो का

नाम ही उद्योग जगत में रोशन नहीं है,बल्कि बच्चे भी अपना नाम उद्योग जगत में शामिल कर के देश में अपनी एक अलग ही नयी पहचान बना रहे हैं.दोस्तों आज हम एक ऐसे ही बच्चे के बारे में बताने जा रहे हैं,जिसने मात्र 13 साल की उम्र में एक कंपनी खड़ी कर ली है.

जिस उम्र में बच्चे अपने दोस्तों के

साथ खेलने कूदने में व्यस्त होते है उस उम्र में इस बच्चे की ऊँची सोच ने इसे सभी बच्चो से अलग कर एक उद्यमी बना दिया है और जल्द ही इनकी कंपनी अपने टर्नओवर को बड़ा कर साल 2020 तक 100 करोड़ रुपए पार करने का एक बहुत बड़ा सपना देख रही है जो जल्द ही कारगर होता दिख रहा है.

हम बात कर रहे हैं मुंबई के

गाडोलिया इंटरनेशनल स्कूल में कक्षा आठ में पढ़ने वाला 13 वर्षीय तिलक मेहता के बारे में जो अपने पिता की इस बात से खफा रहते थे कि वह अपने काम से रोज देर से घर वापस आते थे.एक ऐसी घटना जिसकी वजह से उन्हें यह स्टार्टअप शुरुआत करने का स्त्रोत मिला.तिलक बताते है की कुछ साल पहले मुझे कुछ किताबो की बहुत जरुरत थी परन्तु वह शहर की दूसरे छोर पर उपलब्ध थी. में वहां जा नहीं सकता था क्योकि मै इस काम के लिए बहुत छोटा था.शाम को जब पिता जी घर पर आये तब वह बहुत थके हुए थे उनकी थकावट भरी हालत देख कर मेरी हिम्मत नहीं हुई की पिता जी को अपनी बात कहु और उन किताबो को मांगा सकु.ऐसी परिस्थिति में मेरे दिमाग में एक बात चली की कोई ऐसा होता जो वहाँ से मेरी किताबे ला सकता बस फिर क्या था “समस्या के हल से ही बिजनेस आईडिया की शुरुवात होती है.


यही वह समय था जब मुंबई शहर के

अंदर छोटे पार्सल को 24 घंटे में एक जगह से दूसरी जगह पहुंचने के लिए कंपनी की शुरुवात हुई.इस कंपनी की शुरुवात से पहले उन्होंने अपने आईडिया को अपने पिता के साथ विचार विमर्श किया.तब उन्होंने इस जरूरत को समझते हुए अपनी सहमति दे दी.पिता की सहमति के बाद उन्होंने पेपर्स एंड पार्सल कंपनी को वास्तविक रूप दिया.

तिलक ने अपने आईडिया को वास्तविक रूप देने के लिए

अपने पिता के साथ पहले एक बैंक अधिकारी घनश्याम पारेख जी से मिले उन्होंने उनके सामने यह आईडिया साझा किया.घनश्याम पारेख जी को इस आईडिया में आने वाला लॉजिस्टिक्स बिज़नेस का फ्यूचर दिखाई दिया.उनको यह आईडिया इतना पसंद आया की उन्होंने बैंक की नौकरी छोड़ कर तिलक के साथ जुड़ गए.उन्होंने कंपनी में बतौर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के तौर पर साथ देने लगे

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