Tuesday, November 29, 2022

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महिलाओं को नाक से मांग तक क्यों लगाना पड़ता है सिंदूर, आखिर छठ पूजा से जुड़ा यह राज क्या है

भारत को धार्मिक नगरी कहा जाता है और धर्म से जुड़ा प्रेम हमें अक्सर देखने को मिलता है, कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी को छठ पूजा के नाम से पूजा जाता है। यह यूपी, बिहार और देश के अन्य राज्यों में धूम-धाम से मनाया जाता है। बिहार में इस व्रत को काफी धूम-धाम से मनाया जाता है।

कहा जाता है की इस दिन पति कहीं पर भी हो वह अपनी पत्नी के पास आता है और उसका व्रत खुलवाता है। वैसे इस व्रत को महिलाएं तीन दिन पहले ही शुरू कर देती है। वह निर्जला रहती है और व्रत करती है यह 36 घंटे चलने वाला व्रत होता है। यह सबसे कठिन व्रतों में से एक है। लेकिन इस दिन महिलाओं को एक अलग ही रूप में देखा जाता है महिलाएं नाक से लेकर मांग तक एक लम्बी सिंदूर की मांग भरती आखिर ऐसा क्यों होता है आइये जानते है –

पति की लम्बी उम्र के लिए


मान्यता है की विवाहित स्त्री अगर इस दिन लम्बी मांग भरती है और सिंदूर लगाती है तो पति की उम्र लम्बी होती है कहा जाता है जितनी लम्बी सिंदूर उतनी ही लम्बी उम्र होती है पति की, यही वजह है की बिहार में लम्बी नाक वाली महिलाओं को ज्यादा पसंद किया जाता है।

छठ पूजा के वक्त सूर्य देव को आर्घ्य लगाकर महिलाएं पानी पीती है और पूजा करके दुसरे दिन भोजन करती है यह काफी कठिन व्रत होता है महिलाएं इसे अपनी निष्ठा से पूरी करती है। इस व्रत के दिन महिलायें खूब तैयार होती है और नदी के तट पर जाकर माँ की उपासना करती है।

संतान सुख के लिए सिंदूर लगाना

माना जाता है की माता सीता ने हमेशा सिंदूर ही लगाया था और उसी की तर्ज पर यहाँ की महिलायें भी सिंदूर लगाती है इस दिन व्रत के दौरान वह बहुत बड़ी मांग भरती है और सिंदूर लगाती है। कहा जाता है की ऐसा करने से घर में सुख-संपति का वास होता है

संतान के सुख के लिए भी यह व्रत काफी अच्छा माना गया है कहा जाता है की सच्ची निष्ठा से अगर इस व्रत को किया जाए तो महिला एक सुंदर बच्चे को जन्म देती है जो महिला संतान का सुख प्राप्त नहीं कर पाई है अगर वह इस व्रत को करती है और अगले साल अवश्य ही संतान सुख की प्राप्ति होती है।

सूर्यदेव होते है प्रसन्न

यहाँ की स्त्रियाँ मानती है की जिनकी मांग में जितना सिंदूर लगा होता है वह देखकर सूर्यदेव उनपर प्रसन्न होते है और जो लोग सच्ची निष्ठा से इस व्रत को करते है उनको सूर्यदेव वरदान देते है और उनकी हर एक इच्छा पूरी करते है।

स्त्रियों का मानना है की इच्छापूर्ति का यह व्रत कठिन है लेकिन माता की कृपा से इस व्रत को शुरू करने के बाद एक अलग ही शक्ति महिला में आ जाती है यही वजह है की 36 घंटे तक वह बिना पानी के रहती है और यह किसी के लिए आसान नहीं होता है।

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